अब तेरा ज़िक्र सायद ही ग़ज़ल में आए और से और हुए दर्द के उन्वाँ जानाँ यूहीं मौसम की अदा देखकर याद आया है किस कदर जल्द बदल जाते हैं इंसाँ जानाँ
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