Loading...
BSMe2e Feedback

Contact Us

User Post

ये कौन राह में बैठे हैं मुस्कराते हैं |Azad| | Art | 30299

Published By: User | Shri Chandra Azad

User Location: Basti | Uttar pradesh | India

Categories:
  • Art
Type:
    User Post
ID:
  • 30299
  ये कौन राह में बैठे हैं मुस्कराते हैं मुसाफ़िरों को ग़लत रास्ता बताते हैं तिरे लगाए हुए ज़ख़म क्यों नहीं भरते मरे लगाए हुए पेड़ सूख जाते हैं उन्हें गला था कि मैंने उन्हें नहीं चा... Continue reading
Share It On

 

ये कौन राह में बैठे हैं मुस्कराते हैं
मुसाफ़िरों को ग़लत रास्ता बताते हैं

तिरे लगाए हुए ज़ख़म क्यों नहीं भरते
मरे लगाए हुए पेड़ सूख जाते हैं

उन्हें गला था कि मैंने उन्हें नहीं चाहा
ये अब जो मेरी तवज्जा से ख़ौफ़ खाते हैं

कोई तुम्हारा सफ़र पर गया तो पूछेंगे
कि रेल गुज़रे तो हम हाथ क्यों हिलाते हैं

जो बात अपने लिए दोस्तों के मुँह से सुनी
दुबारा बोलूँ तो होंटों पे ज़ख़म आते हैं

ये कौन राह में बैठे हैं मुस्कराते

Leave a comment